अध्याय १ पंवारी बोली में अभिवादन (रामभलाई या रामरुमाई)
किसी भी भाषा या बोली को उसके संपर्क में रहकर और उसका अपने दैनिक जीवन में सतत् उपयोग करने पर ही सीखा जा सकता है। या ऐसा कह सकते हैं कि अपने भावों का संप्रेषण करने के लिए यदि लक्षित भाषा या बोली का प्रयोग सतत् रूप से किया जाय तो ही उस बोली या भाषा को सीख सकते हैं एवं उस पर हम पकड़ बना सकते हैं।
(पंवारी में अनुवाद― कोई भी बोली या भाषा ला वोको जवर रहके अना रोज-रोज बोल-बोल खे सीख्यो जाय सकऽ से। या असो कह सकऽ सेजन के अपरो मन का उद्गार राखन ला भाषा या बोली ला रोज-रोज बोल-बोल खे सीख सकऽ सेत अना वोको पर अपरी मजबूती बनाय सकऽ सेत।)
टीप ― रोज-रोज शब्द का पंवारी लोकगीत में उपयोग ―
रोज-रोज कालेज मा जासे वो माय,
नवल की बातऽ सांगऽ से ...........
यदि कोई व्यक्ति यह कहे कि वह किसी पुस्तक से अभ्यास करके या किसी शब्द कोष से शब्दों को सीख कर बोलना सीख जाये तो यह संभव नहीं है। कोई भी व्यक्ति बोली या भाषा को केवल और केवल तभी सीख सकता है जब वह अपने दैनिक जीवन में उसके शब्दों, वाक्यांशों एवं वाक्यों का प्रयोग अपने भावों का संप्रेषण करने के लिए बोलता रहे।
(पंवारी में अनुवाद― अदि कोई आदमी यो कहके के वू किताबऽ गिनलऽ पढ़खे या कोई शबदकोष लऽ शबद गिनला सीखखे बोलनो सीख जाय त यो होनो मुसकिल से । कोई भी आदमी बोली या भाषा ला तबच् सीख सकऽ से जब तक रोज-रोज वोका शबद गिनलक, बात्ऽ गिनलक अपरा मन का उद्गार राखन लई बोलतो रह्व।)
चलिए ! पंवारी बोली को इस शर्त पर सीखना आरंभ करते हैं कि इसका प्रयोग हम अपने स्वजातीय बंधुजनों के साथ वार्तालाप में अवश्य करेंगे।
पंवारी बोली में अभिवादन रामभलाई या रामरुमाई
जब भी हम किसी भी व्यक्ति से मिलते हैं तो अभिवादन से वार्तालाप प्रारंभ करते हैं।
हिंदी भाषा में — नमस्कार, नमस्ते, जय राम जी की का प्रयोग करते हैं। आजकल धर्म में अपनी आस्था को प्रदर्शित करने हेतु कुछ लोग राधे-राधे, जय श्री कृष्ण, ऊॅं शांति का प्रयोग भी करते हैं। अंग्रेजी में तो अभिवादन के लिए कुछ अलग ही विधान है।
यहां हम पंवारी (पोवारी) बोली में अभिवादन के लिए किन शब्दों का प्रयोग करते हैं इस बारे में जानते हैं।
जब हम एक दूसरे से मिलते हैं तो अधिकांशतः राम-राम जी का प्रयोग सर्वाधिक करते आये हैं। पंवारी बोली में राम-राम जी कहना सर्व प्रचलन में है। इसके उदाहरण देख लेते हैं —
राम-राम बाबाजी।
राम-राम भाऊ।
राम-राम गा।
इसके प्रत्युत्तर में ऐसे ही कहा जाता है।
अरे ! राम-राम।
या
राम-राम, राम-राम।
आज कल जय राम जी की भी पोवारी बोली में प्रचलन में आ गया है।
पंवार समाज के उत्थान, पंवारी बोली को महत्व देने और अपने कुल, मातृदेवी को के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करने के उद्देश्य से अभिवादन इस प्रकार भी किया जा रहा है —
जय राजा भोज।
जय माय गढ़कालिका।
इस प्रकार से अभिवादन की यह नई रीति अपनी कुल देवी के प्रति श्रद्धा और अपने वंशज राजा भोज के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करने के लिए बहुत आवश्यक है।
अंतिम निष्कर्ष — इस तरह पंवारी बोली में अभिवादन के लिए इन सुसंस्कृत ईश्वरीय नामों का उच्चारण सर्वमान्य है।
१. राम-राम या राम-राम जी।
२. जय राम या जय राम जी की।
३. जय माय गढ़कालिका।
४. जय राजा भोज।
टीप ― पंवारी समाज में महिलाएँ अभिवादन में राम-राम/राम-रामजी/जय राम जी की का प्रयोग कर अभिवादन करना प्रचलन में नहीं है। वर्तमान में महिलाएं भी जय राजा भोज, जय माय गढ़कालिका अभिवादन में प्रयोग किया जाता है।
आपने कितना जाना इस हेतु अभ्यास
१. उक्त के अलावा पंवारी बोली में अभिवादन के शब्द हों तो उनकी सूची बनाइए किंतु इस बात का ध्यान रहे कि इनके प्रयोग के प्रमाण भी दीजिए।
२. मराठी, गुजराती, बंगाली जैसी भारतीय भाषाओं में अभिवादन के शब्दों का पता लगाकर उनकी सूची बनाइए।
आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।
Thank you.
R. F. Tembhre
(Teacher)
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