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पंवारी बोली में स्वागत एवं विदा शब्दावली


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अध्याय २ पंवारी बोली में स्वागत एवं विदाई शब्दावली [मान-भाव (सुवागत) अना बिदा का शबद]

भाग १ हाल चाल एवं आव-भगत की बातऽ (स्वागत शब्दावली)

अभिवादन शब्दों के बाद एक दूसरे का हाल-चाल पूछा जाता है। इस हाल चाल एवं आव-भगत में किन शब्दों, वाक्यांशों एवं वाक्यों का प्रयोग किया जाता है उनका विवरण नीचे देखें।

(१) कसा रह्यात्। (अच्छे रहे?)
(२) साजरा रह्यात् का जी। (अच्छे रहे क्या जी।)
(३) बेस रह्यात् का जी। (अच्छे रहे क्या जी।)
(४) बेस रहीस बाई। (अच्छी रहे क्या बहिन जी/दीदी जी)
(५) भाऊ बेस से? (क्या भैया अच्छे हैं?)
(६) बुड़गी माय साजरी से? (क्या बूढ़ी मां ठीक हैं?)
(७) मजा मा रह्यात् का जी? (आनंद से रहे क्या जी?)
(८) जीजीबाई साजरी से का? (क्या दीदी अच्छी हैं?)
(९) दादा कसो से? (दादाजी कैसे हैं?)
(१०) तुम्हरो घरऽ सब साजरा सेती? (आपके यहां सब अच्छे हैं?)
(११) धान-धन्सी को काम भय गयो? (क्या धान आदि की कटाई गहाई का कार्य पूरा हो गया?)

उक्त बातों का प्रत्युत्तर इस प्रकार दिया जाता है—
(१) मी अच्छो रह्यो जी। (मै अच्छा रहा जी।) या
→ मी साजरो रह्यो जी। (मै अच्छा रहा जी।) या
→ मी साजरोच् रह्यो जी। (मै अच्छा ही रहा जी।)
(२) हव, मी तऽ साजरोच् रह्यो। (हां, मैं तो अच्छा रहा।)
(३) जी मी बेस रह्यो। (जी मैं अच्छा रहा।)
(४) हव बाई मी बेस रही। (हां दीदी मैं अच्छी रही।)
(५) हव ! तुम्हरो भाऊ बेस से। ( हां, तुम्हारे भैया अच्छे हैं।)
(६) हव-हव बुड़गी माय साजरी से। (हां-हां, बूढ़ी मां अच्छी हैं।)
टीप - बूढ़ी मां की बेहतरी बताने के लिए अतिरिक्त बात इस तरह भी कही जाती है।
आब तऽ बुड़गी माय कड़कड़ी से। (अभी तो बूढ़ी मां सशक्त है।)
(७) हव जी मजा रहृयो। (हां जी आनंद से रहे।) स्वयं के द्वारा सामने वाले का हालचाल इस तरह पूछा जाता है।
→ तुम्ही भी रह्यात् का नय मजा मा। (आप भी रहे कि नहीं आनंद से?)
(८) हव, जीजीबाई भी साजरी से। (हां, दीदी भी आनंद से है।)
(९) दादा अच्छो/साजरो से। (दादा जी अच्छे हैं।)
(१०) हव, हमरो घरऽ सब साजरा सेती। (हां हमारे घर सभी अच्छे हैं।)
(११) नय भयो जी , गावखारी का बोझा बाधन का रह गई सेत।
(नहीं हुआ जी, गांव किनारे के खेत के बोझे बाँधने के रह गए हैं।)

उक्त वाक्यों में हम देखते हैं कि हाल-चाल (बेहतरी) पूछने के लिए → साजरा/साजरो/साजरी/साजरे
→ बेस
→ अच्छा/अच्छी/अच्छो
शब्दों का प्रयोग सामान्यत: किया जाता है।

टीप ― बुड़गी माय शब्द आधारित एक पंवारी लोकगीत बहुत लोकप्रिय हुआ है।
या बुड़गी माय परहा लगावन जासे। ........

आपने कितना सीखा इस हेतु अभ्यास

साजरा/साजरो/साजरी/साजरे, बेस, अच्छा/अच्छी/अच्छो शब्दों का प्रयोग कर अपने अन्य संबंधियों (रिस्ते-नातों) के हाल चाल पूछने हेतु वाक्य बनाइए।
नोट - उक्त वाक्यों की नकल नहीं करें।

भाग २ — बिदा का शबद / बातs (विदा शब्दावली)

अभिवादन, हाल-चाल एवं आवभगत के बाद विदाई का समय भी आता है। विदा के समय जिन शब्दों/वाक्यांशों का प्रयोग किया जाता है, उनका विवरण नीचे देखें।

(१) अता जासू बाई। (अब चलती हूँ दीदी।)
(2) जासू तऽ जी। (तो चलता हूँ जी।)
(३) अता जासेजन तऽ । (अब चलते हैं।)
(४) अता हमला बिदाई देव। (अब हमको विदाई दो।)
(५) फेर आवबोन। (फिर आयेंगे।)
(६) हमरी जान की घड़ी आय गई। (हमारा जाने का वक्त हो गया।)
(७) मोरी जान की बेरा भय गई। (मेरे जाने का वक्त हो गया।
(८) हमी जाय रह्या सेजन। (हम जा रहे हैं।)
(९) लगत तऽ मानभाव कर्यात। (बहुत तो मेहमाननवाजी किये।)
(१०) मोला जल्दी जानो पड़्हे। (मुझे शीघ्र जाना होगा)
(११) अता जासू। (अब चलता हूं।)

उक्त बातों का प्रत्युत्तर इस प्रकार दिया जाता है—
(१) हव। तऽ अता कबऽ आहो? (ठीक है तो कब आवोगे?)
(२) अखिन एक दिन रह जातात्। ( और एक दिन रूक जाते।)
(३) जानऽ ना जी, आबऽ त बड़ी तपन से। (चले जाइएगा, किंतु अभी बहुत धूप है।)
(४) तऽ अता जाहोच्? (तो जावोगे ही?)
(५) हव कसो नय आहो तऽ। बड़दादा (बडो) ला धाड़ नऽ।
(हां जी, कैसे नहीं आवोगे तो। बड़े पिताजी (ताऊजी) को भेजना।)
(६) बडीमाय ला खबर सांग नऽ। (बड़ी मां को कुशलक्षेम बताना।)
(७) आज को दिन रुक जाव ना। (केवल आज के दिन रुक जाइए। )
(८) आबऽ बेरा नय भई काहे कि बस चार बजे आवऽ से।
(अभी समय नहीं हुआ क्योंकि बस चार बजे आती है।)
(९) हमरी मनकी तऽ भईच् नहीं। मी खीर बनाहूं कह रही होती। (हमारे मन माफिक तो हुआ ही नहीं। मैं खीर बनाऊंगी ऐसा कह रही थी।)
(१०) हव, अता तुमला जल्दीच् से नय त ठंडी बेरा जातात्।
(हां आपको जल्दी ही है, नहीं तो मौसम ठंडा होने के बाद जाते।)
(११) ठीक से त जाय अता। (ठीक है तो, जाइए अब।)
(११) पाहुना जान लगीन। (अतिथि जाने लगे।)
(१२) माय ला मोरी खबर सांगजो। (मां को मेरी कुशलक्षेम बताना।)

इस तरह विदाई के समय उक्त तरह के वाक्यों का प्रयोग किया जाता है। जब प्रस्थान करते हैं तो उन्ही शब्दों का प्रयोग करते हैं जब मिलने पर ईश्वर का स्मरण करते हुए अभिवादन करते हैं।
(१) अच्छा तऽ राम-राम जी।
(२) राम-राम जी
(३) ठीक से त्, जय माय गढ़कालिका।
(४) अच्छा तऽ जय राजा भोज।

आपने कितना सीखा इस हेतु अभ्यास

उक्त तरह के विदा होने से संबंधित अन्य वाक्य बनाइए।
नोट - उक्त वाक्यों की नकल नहीं करें।

आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।
Thank you.
R. F. Tembhre
(Teacher)

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